वो देखो बैठा है एक रोता बिलखता बच्चा...
धुल -मिटटी से लबरेज ,कितना परेशान हो बैठा है ,
उन मासूम आँखों को कैसे चट्टान बनाए बैठा है !
बेबसी की ये दुनिया भी उसकी कितनी गरीब है
उसके सपने तो देखो कितने अजीब है ...
रात के लिए रोटी ..और एक कम्बल - ठण्ड का सामान चाहिए ;
बीमार माँ की दवाईयां ..बस इतना ही मुकाम चाहिए !!
उसका मासूम बचपन तो उसी समय छील गया
जब उसके बाप को ,काल युहीं अकाल लील गया
अब तो बस ज़िन्दगी में काले बादलो के घेरे है
समय समय पर परीक्षा लेते समय के थपेड़े है ..
डर है कहीं ..ठोस धरातल और उसपे बसती जमीनी सच्चाई
उसका नाज़ुक बचपन ना तोड़ दे
उसकी जिजीविषा को कहीं अपनी उबड़ खाबड़ सतह से ना मरोड़ दे
अगर ऐसा हुआ ... तो फिर एक बचपन खुद से रूठ जाएगा
और - एक और घडा बनने से पहले ही टूट जाएगा !!
वो देखो - दूर कोने में बैठा है एक रोता बिलखता बच्चा....
चीथडो में सहमा सा ,भूख से लाचार वो ,
टुकड़ा -टुकड़ा बिखरते उसके पल - पल विचार, वो ....धुल -मिटटी से लबरेज ,कितना परेशान हो बैठा है ,
उन मासूम आँखों को कैसे चट्टान बनाए बैठा है !
बेबसी की ये दुनिया भी उसकी कितनी गरीब है
उसके सपने तो देखो कितने अजीब है ...
रात के लिए रोटी ..और एक कम्बल - ठण्ड का सामान चाहिए ;
बीमार माँ की दवाईयां ..बस इतना ही मुकाम चाहिए !!
उसका मासूम बचपन तो उसी समय छील गया
जब उसके बाप को ,काल युहीं अकाल लील गया
अब तो बस ज़िन्दगी में काले बादलो के घेरे है
समय समय पर परीक्षा लेते समय के थपेड़े है ..
डर है कहीं ..ठोस धरातल और उसपे बसती जमीनी सच्चाई
उसका नाज़ुक बचपन ना तोड़ दे
उसकी जिजीविषा को कहीं अपनी उबड़ खाबड़ सतह से ना मरोड़ दे
अगर ऐसा हुआ ... तो फिर एक बचपन खुद से रूठ जाएगा
और - एक और घडा बनने से पहले ही टूट जाएगा !!
वो देखो - दूर कोने में बैठा है एक रोता बिलखता बच्चा....
